क्या होता है NPA और कैसे यह देश की विकास की रफ्तार पर लगाता है ब्रेक ( What is the NPA and how it imposes on the pace of development of the country):

क्या होता है NPA  और कैसे यह देश की विकास की रफ्तार पर लगाता है ब्रेक ( What is the NPA and how it imposes on the pace of development of the country):


क्या होता है एनपीए (  What is NPA ):

एनपीए यानि नॉन परफॉर्मिंग एसेट , जिसका हिंदी में अर्थ गैर निष्पादित संपत्ति होती है जब बैंक किसी को लोन देता है और वह बैंक को कुछ समय बाद उस लोन पर ब्याज देना और फिर किश्तें देना बंद कर देता है तो बैंक उसे एक निश्चित समय सीमा के बाद एनपीए घोषित कर देता है। 


साधारण भाषा में कहें तो बैंक का यह पैसा एक तरह से उसके पास से दूर चला जाता है और बैंक के पास उस पैसे का कोई लाभ नहीं मिलता है। नियमानुसार किसी भी लोन की किश्त, मूलधन और ब्याज अगर 90 दिन से अधिक तक बैंक को नहीं मिलता है तो उसे एनपीए में डाल दिया जाता है।

एनपीए  के प्रकार ( Types of NPA):
एनपीए मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, 
  1. पहला सबस्टैंडर्ड, 
  2. दूसरा डाउटफुल 
  3. तीसरा लॉस यानि हानि वाला।
  • सबस्टैंडर्ड एनपीए के तहत उस राशि को डाला जाता है जिसमे 12 महीने या उससे कम समय तक कोई भी रिटर्न नहीं आता है, 

  • डाउटफुल एनपीए में वह लोन आता है जिसमे 12 महीने बाद भी कोई रिटर्न नहीं आता है। 
  • लॉस में उस राशि को डाला जात है जब आरबीआई को यह पता चल जाता है कि यह पैसा लॉस का है और इसे राइट ऑफ नहीं किया जा सकता है।


एनपीए से देश और बैंकों पर असर ( NPA impact on country and banks ):

एनपीए के चलते बैंकों को मिलने वाला लाभ कम हो जाता है, जिससे सरकार के पास राजस्व कम पहुंचता है, ऐसे में सरकार की निवेश करने की क्षमता में गिरावट आती है और देश के विकास की रफ्तार कम हो जाती है, साथ ही बेरोजगारी की समस्या बढ़ती है। लिहाजा इस स्थिति से निपटने के लिए बैंक अपनी ब्याज दर को बढ़ाता है ताकि वह इस नुकसान की भरपाई कर सके।

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