बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ी सोच जरूरी ( Big thinking needed to become big man )

बड़ा आदमी बनने के लिए बड़ी सोच जरूरी
 ( Big thinking needed to become big man )
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जानकारी ( Information )

मन में यदि दृढ़ विश्वास हो, इरादे नेक हों तो सफलता अपने आप कदम चूमती है। ऐसा मानना है जिला ऊना के उपमंडल अंब के ठट्ठल गांव में जन्मी बेस्ट ट्रेनी रही आईपीएस अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री का। शालिनी ने ‘दिव्य हिमाचल’ से दिल के राज साझा करते हुए बताया कि बीएससी की पढ़ाई तक कभी नहीं सोचा था कि वह आईपीएस अधिकारी के पद तक पहुंचेगी। शालिनी के माता-पिता करीब 20 साल पहले अपना पैतृक गांव छोड़ नौकरी के चलते धर्मशाला शिफ्ट हो गए थे। वहां पर किराए के मकान में जीवन-यापन करते हुए शालिनी अग्निहोत्री ने अपनी प्राइमरी व जमा दो तक की पढ़ाई डीएवी स्कूल धर्मशाला से प्राप्त की। उसके बाद पालमपुर में बीएससी एग्रीकल्चर करने के बाद लुधियाना में एमएससी करते-करते वर्ष 2011 में यूपीएस का टेस्ट पास करके हैदराबाद में आईपीएस की आउट डोर व इंडोर ट्रेनिंग शुरू कर दी। ट्रेनिंग के दौरान अपना वर्चस्व कायम रखते हुए शालिनी ने सभी विषयों की सामूहिक गिनती के बाद टॉपर रहने का गौरव हालिस किया। शालिनी ने अपनी पढ़ाई के दौरान कभी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया और न ही इसमें उसका कोई विश्वास है। सुबह नौ से दोपहर पांच बजे तक स्कूल, कालेज आदि के बाद शालिनी दो घंटे तक अपना पसंदीदा खेल बैडमिंटन खेलती है। बैडमिंटन प्रतियोगिता में शालिनी ने नेशनल स्तर तक खेलने का गौरव भी हासिल किया है। शालिनी ने दृढ़ संकल्प व प्रयास से एमएससी की अधूरी पढ़ाई को टे्रनिंग के बाद लुधियाना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में पूरा किया।


कांगड़ा की तारीफ ( Praise of  kangra )

शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि कांगड़ा जिला के लोग लड़का व लड़की को एक समान मानते हैं। उन्होंने कहा कि जींस पहनकर व घर में गाडि़या रखकर कोई महान नहीं बन जाता है। महान बनने के लिए अपनी सोच बदलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जिला ऊना का क्षेत्र समतल होने तथा पंजाब के साथ सटे होने के चलते प्रदेश में ऊना की अलग ही पहचान है, लेकिन लोगों की सोच में समय के मुताबिक अभी अपेक्षित बदलाव व खुलापन नही आया है।

भावुक हुए अभिभावक ( Passionate guardian )

जब मीडिया कर्मियों से शालिनी अपने विचार साझा कर रही थी तो पास बैठे उसकी माता शुभलता, पिता रमेश अग्निहोत्री व बड़ी बहन डा. रजनी देवी इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से खुशी के आंसू टपकने शुरू हो गए, लेकिन फुर्तीली व चंचल स्वभाव की शालिनी ने भावुकता के इस माहौल में अपने धैर्य को दृढ़ बनाए रखकर वास्तव में एक आईपीएस अधिकारी बनने का जानकारी दिया।

पढ़ाई के साथ-साथ खेल जरूरी ( Game required along with studies )

आईपीएस अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री ने कहा कि बच्चों को किताबी कीड़ा बनाकर अभिभावक अपने बच्चों के बचपन को खराब कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी जिंदगी का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ अभिभावक ट्यूशन को अपना स्टेट्स बनाकर बच्चों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मन में ड्रीम व काम पर फोकस ही सफलता का मूल मंत्र है।


बुधवार को पहुंची पैतृक गांव ( Paternal village reached on Wednesday )

आईपीएस की बेस्ट ट्रेनी अवार्ड से अलंकृत शालिनी चंडीगढ़ से बुधवार देर रात्रि करीब तीन बजे अपने पैतृक गांव ठट्ठल में पहुंची। गुरुवार सुबह उसने सबसे पहले हनुमान मंदिर ठट्ठल में पूजा अर्चना की। इसके बाद पैतृक निवास पर एकत्रित गांववासियों व रिश्तेदारों के संग खुशियों को साझा किया। इस अवसर पर उनकी बड़ी बहन डा. रजनी, माता शुभलता, पिता रमेश, ताया सुदेश कुमार, शामलाल, ब्रह्म दास, बिशनदास, सुदर्शन कुमार समेत भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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