जेनेवा कन्वेंशन क्या है? ( What is the Geneva Convention? )

जेनेवा कन्वेंशन क्या है?  ( What is the Geneva Convention? )

अगर लड़ाई में कोई जवान या अधिकारी शत्रु देश की सीमा में दाखिल हो जाता है तो गिरफ्तारी की सूरत में उसे युद्धबंदी माना जाता है. युद्धबंदियों के संबंध में जेनेवा में व्यापक विचार कर कुछ नियम बनाए गए जिसे हम जिनेवा कन्वेंशन के तौर पर जानते हैं.

इस समझौते के तहत ऐसे किसी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है. युद्ध बंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता है. उसे किसी तरह से अपमानित नहीं किया जा सकता है.

इस संधि के तहत एक विकल्प ये भी है कि युद्ध के समाप्त हो जाने के बाद उन्हें वापस लौटा दिया जाए.

जेनेवा कन्वेंशन के मुताबिक युद्धबंदियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है. कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में

उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता. युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है.

जेनेवा कन्वेंशन की खास बातें:

•   जेनेवा कन्वेंशन के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाएगी.

•   इसके तहत उन्हें खाना-पीना और युद्ध की सभी जरूरी चीजें मुहैया कराई जाएगी.

•   इस कन्वेंशन के मुताबिक किसी भी युद्धबंदी को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता.

•   किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है वह इस संधि के तहत आ जाता है.

•   जेनेवा कन्वेंशन के मुताबिक उसे डराया-धमकाया नहीं जा सकता.

•   इसके तहत युद्धबंदी से उसकी जाति, धर्म, जन्म आदि के बारे में नहीं पूछा जा सकता

जेनेवा कन्वेंशन कब और क्यों हुआ?

पहला जेनेवा समझौता वर्ष 1864 में हुआ था. दूसरा समझौता वर्ष 1906 और तीसरा वर्ष 1929 में हुआ. जेनेवा कन्वेंशन पर दूसरे विश्वयुद्ध के बाद वर्ष 1949 में चौथी सहमति बनी. युद्ध के दौरान भी मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए जेनेवा समझौता हुआ था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी जो कि अब तक लागू है. इसमें युद्धबंदियों के अधिकार तय किये गये हैं. उसके खिलाफ मुकदमा भी इन्हीं नियमों के तहत चलाया जा सकता है. युद्धबंदी को लौटाना भी होता है

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